मान लीजिए आप किसी मेडिकल इमरजेंसी में अस्पताल पहुँचे और बिल देखकर घबरा गए। आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस है, लेकिन वो बिल का सिर्फ एक छोटा हिस्सा कवर कर रहा है। या फिर आपने कोई सस्ता प्लान लिया था, लेकिन ज़रूरत के समय पता चला कि वो आपकी बीमारी को कवर ही नहीं करता।
चलिए, आपको बिना झंझट के समझाता हूँ कि एक अच्छी और किफायती स्वास्थ्य बीमा योजना कैसे चुनें।
पहला कदम: अपनी “सस्ती” की परिभाषा तय करें
यहाँ सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग प्रीमियम (मासिक/वार्षिक भुगतान) को ही “सस्ता” मान लेते हैं। असल में “सस्ता” वह प्लान है जो:
- जरूरत के समय पर्याप्त कवर दे
- छुपे हुए खर्चे न हो (कैशलेस क्लेम में दिक्कत न आए)
- लंबे समय तक चले (हर साल न बदलना पड़े)
याद रखें: वो प्लान जिसका प्रीमियम ₹5000 सालाना है, लेकिन हर क्लेम पर आपको ₹50,000 खर्च करने पड़ें, वह ₹8000 प्रीमियम वाले प्लान से महँगा है जो 90% बिल कवर कर दे।
6 जरूरी बातें जो हर सस्ती योजना में होनी चाहिए
1. पर्याप्त सम इंश्यर्ड (Sum Insured)
- कितना? कम से कम ₹5 लाख (2026 के हिसाब से)
- क्यों? आजकल हार्ट अटैक, कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज ₹3-10 लाख तक हो सकता है।
- टिप: अगर बजट कम है, तो ₹3 लाख का बेसिक प्लान लें, पर सुपर टॉप-अप जरूर जोड़ें (यह सस्ता पड़ता है)।
2. रूम रेंट लिमिट न हो या पर्याप्त हो
- देखें क्या? पॉलिसी में “रूम रेंट सब-लिमिट” न हो।
- क्यों? अगर रूम रेंट ₹5000/दिन तक सीमित है, और आप ₹8000 वाले रूम में एडमिट हुए, तो पूरा बिल रिजेक्ट हो सकता है!
- सस्ता विकल्प: “नो सब-लिमि�िट” प्लान थोड़ा महँगा हो सकता है, लेकिन सेफ है।
3. प्री-हॉस्पिटलाइजेशन और पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन खर्च
- कितने दिन? कम से कम 30 दिन पहले और 60 दिन बाद तक के टेस्ट, दवाई, कंसल्टेशन कवर हों।
- क्यों? अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद का खर्च भी बड़ा होता है।
4. नेटवर्क अस्पतालों की संख्या
- क्या देखें? आपके शहर/इलाके में कम से कम 4-5 अच्छे नेटवर्क अस्पताल हों।
- कैसे चेक करें? इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर “हॉस्पिटल लोकेटर” देखें।
- टिप: सिर्फ नाम न देखें—अस्पताल जाकर पूछें कि “कैशलेस क्लेम” आसानी से होता है या नहीं।
5. क्लेम सेटलमेंट रेशियो (CSR)
- क्या है? हर 100 क्लेम में से कितने सेटल होते हैं।
- कितना हो? 95%+ अच्छा माना जाता है।
- कहाँ देखें? IRDAI की ऑफिशियल रिपोर्ट में (सर्च करें “IRDAI Annual Report CSR”)।
6. प्री-एग्जिस्टिंग डिसीज़ (PED) वेटिंग पीरियड
- क्या है? बीमा लेने से पहले की बीमारियाँ (जैसे डायबिटीज, BP) कब तक कवर नहीं होंगी।
- कितना हो? सबसे सस्ते प्लान में 2-4 साल तक हो सकता है। कोशिश करें 2 साल से कम का लें।
- टिप: अगर PED हैं, तो पहले साल का प्रीमियम कम हो सकता है, लेकिन कवर नहीं मिलेगा।
किन चीजों पर पैसे बचा सकते हैं? (स्मार्ट कम्प्रोमाइज)
1. कॉ-पेमेंट (Co-payment) चुनें
- क्या है? हर क्लेम में आप एक छोटा परसेंटेज (जैसे 10%) देंगे, बाकी इंश्योरेंस कंपनी देगी।
- फायदा: प्रीमियम 20-30% तक कम हो जाता है।
- कब ठीक है? अगर आप कम उम्र के हैं और बड़ी बीमारी का रिस्क कम है।
2. सालाना प्रीमियम भरें
- मासिक/त्रैमासिक की जगह सालाना भुगतान करने पर 5-10% डिस्काउंट मिलता है।
3. फैमिली फ्लोटर प्लान
- अलग-अलग प्लान लेने से ज्यादा फैमिली फ्लोटर सस्ता पड़ता है।
- ध्यान रखें: सबका सम इंश्यर्ड शेयर होगा। अगर एक सदस्य को भारी इलाज चाहिए, तो पूरे परिवार का कवर कम हो जाएगा।
4. डिडक्टिबल (Deductible) बढ़ाएँ
- क्या है? एक निश्चित रकम (जैसे ₹1 लाख) तक का बिल आप खुद भरेंगे, उसके बाद इंश्योरेंस कवर करेगा।
- फायदा: प्रीमियम काफी कम हो जाता है।
- रिस्क: छोटी-मोटी बीमारियों पर इंश्योरेंस का फायदा नहीं मिलेगा।
5 सबसे बड़ी गलतियाँ जो महँगी पड़ती हैं
1. सिर्फ प्रीमियम देखकर खरीद लेना
- होता क्या है: प्लान ले लिया, पर क्लेम के समय पता चला कि आपकी बीमारी “एक्सक्लूडेड” है।
2. मेडिकल चेकअप न कराना
- होता क्या है: क्लेम के समय कंपनी कहती है “आपको पहले से यह बीमारी थी, हम कवर नहीं करेंगे।”
3. टर्म्स एंड कंडीशंस न पढ़ना
- सबसे जरूरी पढ़ें:
- “एक्सक्लूजन” लिस्ट (क्या कवर नहीं है)
- “वेटिंग पीरियड”
- “सब-लिमिट्स”
4. एजेंट की बात पर 100% भरोसा करना
- सत्यापन जरूर करें: जो भी वादा एजेंट करे, उसे पॉलिसी डॉक्यूमेंट में लिखित देखें।
5. नवीनीकरण (Renewal) भूल जाना
- पॉलिसी लैप्स होने पर:
- वेटिंग पीरियड फिर से शुरू
- नो क्लेम बोनस खत्म
- प्रीमियम बढ़ सकता है
स्टेप बाई स्टेप चुनने की प्रक्रिया
स्टेप 1: ऑनलाइन कंपेयर करें
- वेबसाइट्स: PolicyBazaar, Coverfox, Insurancedekho
- फिल्टर लगाएँ: अपना बजट, उम्र, परिवार का साइज डालें
स्टेप 2: शॉर्टलिस्ट 3 प्लान
- प्रीमियम के हिसाब से नहीं, फीचर्स के हिसाब से
स्टेप 3: कस्टमर केयर से बात करें
- सीधे इंश्योरेंस कंपनी को कॉल करें
- पूछें: “अगर मुझे यह बीमारी हो जाए, तो कवर मिलेगा या नहीं?”
स्टेप 4: डॉक्यूमेंट पढ़ें
- पॉलिसी वर्डिंग/ब्रोशर डाउनलोड करें
- किसी जानकार को दिखाएँ अगर समझ न आए
स्टेप 5: खरीदें और सबको बताएँ
- परिवार के हर सदस्य को पॉलिसी नंबर, कंपनी हेल्पलाइन बताएँ
- अस्पताल जाते समय पॉलिसी डिटेल्स साथ ले जाएँ
सरकारी सस्ती योजनाओं के विकल्प
1. आयुष्मान भारत (PM-JAY)
- कवर: ₹5 लाख प्रति परिवार प्रति वर्ष
- कौन: SECC डेटाबेस में आने वाले परिवार (गरीबी रेखा से नीचे)
- कैसे चेक: https://pmjay.gov.in पर अपना नाम देखें
2. राज्य सरकार की योजनाएँ
- उदाहरण: मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना (राजस्थान), महात्मा ज्योतिबा फुले योजना (महाराष्ट्र)
- फायदा: प्रीमियम बहुत कम या फ्री
- सीमा: आमतौर पर अपने राज्य के अस्पतालों तक सीमित
अंतिम चेकलिस्ट (खरीदने से पहले)
- सम इंश्यर्ड कम से कम ₹5 लाख
- रूम रेंट पर कोई सब-लिमिट नहीं
- प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवर
- क्रिटिकल इलनेस कवर (अगर बजट में हो)
- नेटवर्क अस्पताल आपके इलाके में हैं
- क्लेम सेटलमेंट रेशियो 90%+
- वेटिंग पीरियड: 30 दिन (सामान्य), 2 साल (PED)
- प्रीमियम आपके बजट में
- नवीनीकरण प्रीमियम तय है (या थोड़ा ही बढ़ेगा)
निष्कर्ष: आपका एक्शन प्लान
- आज ही ऑनलाइन कंपेरिजन करें (30 मिनट लगेंगे)
- 3 प्लान शॉर्टलिस्ट करें
- कंपनी से सीधे बात करके डाउट क्लियर करें
- पॉलिसी डॉक्यूमेंट पढ़ें (कम से कम एक्सक्लूजन वाला हिस्सा)
- खरीदें और फैमिली को इनफॉर्म करें
याद रखें: सबसे “सस्ता” प्लान वह नहीं जिसका प्रीमियम कम है, बल्कि वह है जो जरूरत के समय काम आए। थोड़ा प्रीमियम ज्यादा देना बेहतर है, बजाय इसके कि इमरजेंसी में लाखों रुपये का बिल आपके सिर पर आ जाए।
आपके लिए सवाल:
आपकी उम्र क्या है और क्या आपके परिवार में किसी को पहले से कोई बीमारी है? इससे मैं आपको और सटीक सलाह दे सकता हूँ।
📩Note: JankariSeva
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